खाप पंचायत


प्रत्येक समाज के सामने सदा समस्याये रहती है | प्रश्न यह उठता है की इन समस्यायओ का स्वरूप क्या है ? आखिर समाज बना ही क्यू ? शायद इसका जवाब यह हो सकता है की अपने को सुरक्षित रखने के लिए वाह्य प्राकृति से रक्षा करने के लिए उससे सामजस्य स्थापित करने के लिए |मानव के विकास के लिए समाज एक आवश्यक उपकरण है | सभ्यता , संस्कृति , विचारधारा ,धर्म ये सभी समाज के उपकरण है | जो मनुष्य को हमेशा से नई सीख देने का प्रयास करती है | यही उपकरण मनुष्य को बताते है की आप का अस्तित्व तथा पहचान क्या है ? इसी उपकरण के अंतर्गत सम्मान और धर्म जैसे शब्द भी आते है | अंग्रेज़ी भाषा में जिस शब्द के लिए ओंनर , रिसपेक्ट ,आदि शब्द का प्रयोग होता है | उसे हम लोग इज़्ज़त , आदर सम्मान , गौरव या गरिमा मानते है | यही भाव मनुष्य के अस्तित्व का अंग है पर यह भाव मनुष्य के अस्तित्व का अंग एक दिन में नहीं बना | बल्कि उसकी चिंतन प्रक्रिया के फलस्वरूप , लंबे जीवन के अनुभव से ऊपजी सोच का फल है |इसी सोच का परिणाम था की मनुष्य ने आगे चलकर अपने – अपने अनुसार धर्म और रीति – रिवाज़ों का निर्माण किया पर आज इसी का हवाला देकर धर्म के ठेकेदार और अमानवीय खाप पंचायाते अपनी ही खुबसूरत धरती को कुरुतियों , कुसंस्कारों के प्रहारों से दिन पर दिन मलिन करते जा रहे है | 21 वी सदी में हमारे देश में अभी भी ऐसे राज्य है | जहा ज़हालत का अंधेरा है हरियाणा , पश्चिम उत्तर प्रदेश , राजस्थान , पंजाब के कुछ अंचलों में अभी भी खाप पंचायतों के तालिबानी तथा अमानवीय फ़रमानों से युवक और युवतियों की ज़िन्दगी संकट में है | हरियाणा जैसे राज्य में लड़कियो का जन्म होना अभी भी घृणा के रूप में देखा जाता है | तो दूसरी तरफ यही हरियाणा के लोग अपनी हवस को पूरा करने के लिए नार्थ-ईस्ट , झारखंड जैसे राज्यों से लड़कियो को ख़रीदते है | इन विकृत मानसिकता वाले लोगो को तो औरत के गर्भ में संतान के रूप में लड़की नहीं चाहिए , पर बिस्तर पर औरत जरूर चाहिए | ऐसी परम्परा समाज के मुह पर कालिख़ है | उसके झूठे सम्मान पर एक तमाचा है और उसके सामने खड़ा एक ऐसा प्रश्न है जो उसे मुह चिढ़ा रहा है | अख़बारो में आये दिन सम्मान के लिए हत्या की ख़बरे आती रहती है | जो हमे सोचने पर मजबूर करती की जिस देश में लोंगों जीने की आज़ादी का अधिकार प्रदान किया जाता है वहा तालिबानी फ़रमान लागू किया जाता है की स्त्री घर से अकेली नहीं निकलेगी , लड़किया जींस नहीं पहनेगी , मोबाईल नहीं रखेगी ,कम उम्र में उनकी शादी कर दी जाए , मनोज़ और बबली के हत्यारे को बचाने के लिए हर घर से दस – दस रूपिया लिया जाए , निर्भया के दोषियो को फ़ासी नहीं दी जाए , सुप्रीम कोर्ट की बात हम नहीं मानेगे आदि ऐसे बहुत सारे प्रकरण है | जो खाप के दूसरे चेहरे को उज़ागर करती है | हमारे देश में हिंसा बढ़ने का एक कारण यह है कि कुछ वर्गों ने परम्परागत शोषण तथा नये युवा वर्ग ने पुरानी विचारधारा को मानने से इंकार कर दिया | इसमे संदेह नहीं है कि भारतीय समाज ने एक मोटे तौर पर अहिंसक तथा सामंजस्यपूर्ण व्यवस्था का विकास किया था | पर इसमें भी शोषण के कुछ तत्व मौजूद थे | जो समय के साथ –साथ बदलते गए पर इन्हे लोकतन्त्र के ढ़ाचे में छिपा दिया गया | पर जब- जब इन्हें मौका मिला अपना असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया | एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था हर हाल में संवेंदना पर टिकी होती है और समाजिक हिंसा का मतलब पूरी तरह से संवादहीनता | यही कारण है कि हिंसा से अपनी बात मनवाने का हौसला बढ़ता ही जा रहा है | इससे पहले की हम खाप को समझे उससे पहले हम पंचायत को समझ लेते है | यह सत्य है की खाप और पंचायत में अंतर होता है | एक संवैधानिक संस्था है तो दूसरी असंवैधानिक संस्था है |

पंचायत.

EVERY CAST IN EVERY VILLAGE OR TOWN HAS ITS OWN RULS AND REGULATIONS, AND ELECTS REPERESNTATIVES,AND FURNISHESS AN EXPACT PRO TO TYPE OF THE SAXAN WITANS FROM WHICH HAVE SPRING THE PRESENT PARLIAMENTARY.

( M.K GANDHI ).

IT IS THE FUNCTION OF THE PANCHYAT TO REVIVE HONESTY AND INDUSTRY…. IT IS THE FUNCATION OF THE PANCHYATS TO TEACH THE VILLAGE TO AVOIDE DISPUTES , IF THEY HAVE TO SETTEL THEM THIS WILL ENSURE SPEEDY JUSTIC WITHOUT ANY EXPENDITURE .

( M.K GANDHI ) . स्रोत – Harjan,January,4,1948.

महात्मा गांधी के इन दों कथनों से पता चलता है की पंचायतों का विकास देश के विकास के साथ – साथ गाँव में रहने वाले लोंगों को अधिक से अधिक मज़बूती प्रदान करना था | इसी को ध्यान में रखते हुए दिसंबर 1992 में पारित संविधान के 73 वे और 74 वे संशोधन में भाग 9 तथा 9 क जोड़ा गया | 73 वा संशोधन पंचायत तथा 74 वा नगर पालिका के रूप में आया था |( स्रोत – कश्यप , सुभाष , हमारा संविधान ,पृ ,306 )

खाप पंचायतें

अब हम खाप पर आते है | यदि हम खाप का विश्लेषण करे तो यह दों शब्दो से बना है – ख़ और आप | ख का अर्थ है आकाश और आप का अर्थ है ज़ल | अर्थात ऐसे संगठन जो आकाश की तरह सर्वोपरी हो तथा पानी की तरह साफ , निर्मल और सबके लिए न्यायकारी हों | ( स्रोत - www.khaappanchyat.com ) खाप पंचायतों का इतिहास बहुत ही पुराना है यदि हम मिथको पर ध्यान दे तो ज्ञात होता है की .... जब राज़ा दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव को न बुलाकर के अपमान किया | तब पार्वती को यह बात पता चली तो उन्होने अग्नि कुंड में कूद करके अपनी ज़ान दे दी | जब शिवाजी को यह बात पता चली तो उन्होने वीरभद्र को को आज्ञा दी की अपनी गज़ सेना लेकर के राजा दक्ष पर आक्रमण करके उसका सिर काट दे | रामायण काल में भी हनुमान जी की बानर सेना वास्तव में एक सर्वखाप पंचायत ही थी | जिसमे भील , कोल, वानर , रीच , जटायु आदि विभिन्न जातियों तथा खापों के लोग शामिल थे | इस सेना की अध्यक्षता महाराजा सुग्रीव ने और सलाहकार वीर जामवंत थे | समय के चक्र के साथ हर बदलते युग में खाप पंचायतों अपना वजूद बनाए रखा तथा सतयुग से लेकर मुग़ल और अंग्रेज़ो के शासन काल तक इन खाप पंचायतों के वजूद को कोई हिला नहीं सका | वर्तमान समय में कुछ खाप पंचायते निम्नलिखित है --

बड़वासनी खाप


12 गाँव

कराला खाप


17 गाँव

चौहान खाप


5 गाँव

तोमर खाप


84 गाँव

दहिया खाप


40 गाँव

पालम खाप


365 गाँव

मीतरोल खाप


24 गाँव


बड़ी खापों से निकलकर ही छोटी खापों ने जन्म लिया | आज जाटों के करीब पैतीस सौ खाप अस्तित्व में है |

स्रोत - www.khaappanchyat.com

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बड़ी खापों से निकलकर ही छोटी खापों ने जन्म लिया |आज जाटों के करीब पैतीस सौ खाप अस्तित्व में है | इन्ही खाप पंचायतों में सबसे बड़ी खाप पंचायत हरियाणा खाप पंचायत है | इसमे ज्यादातर जाट समुदाय के ही लोग है | इतना तो तय है की इन छोटी और बड़ी खाप पंचायतों का कोई ना कोई सर्वेसर्वा तो होगा ही | यह सर्वेसर्वा होती है सर्वखाप पंचायते | यदि इन खाप पंचायतों से किसी समस्या का हल नहीं होता है | तब सभी खाप पंचायते एक तय जगह और तय समय पर आकर बैठक करती है और उत्तपन समस्या का हल खोज़न का प्रयास करती है | यही स्वरूप इन्हे सर्वखाप पंचायत बनाती है | सर्वपाल खाप में 22 गाँव है जो फ़रीदाबाद से लेकर के मथुरा जिले के छाता,कोसी तक फैला है | इसमे भी निम्नलिखित सर्वपाल खापपंचायते है ----

सर्वपाल खाप में 22 गाँव है जो फ़रीदाबाद से लेकर के मथुरा जिले के छाता , कोसी तक फैला है |

कोसी की


डीड़े पाल

बैठन की


ग़ढ़ोना पाल

कामर की


बेनीवाल पाल

पैगाँव की


रावत पाल

स्रोत -www.khaappanchyat.com

सर्वगोत्रीय जाट का मुख्यालय आगरा जनपद के बिचूपरी गाँव में है |इस आधार पर कहा जा सकता है की खाप व्यवस्था की जड़े काफी मजबूत तथा विस्तृत क्षेत्र तक फैली है |पर जिसका क्षेत्र जितना विस्तृत होता है उसके कुछ अच्छे और बुरे कार्य भी होते है | यह एक ध्रुव सत्य है की स्त्री तथा पुरुष मूलतः एक ही है | इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता है की विश्व को सज़ाने,सवारने तथा उसे सुंदर बनाने में नारी की भूमिका मुख्य होती है | जैसे-जैसे पुरुष सभ्यता की सीढियों पर चढ़ता गया , वैसे –वैसे नारी के अधिकारों में कटौती करता गया | जिस नारी के बिना समाज की कल्पना भी नहीं की जा सकती है | उसी नारी को कुछ विकृत मानसिकता वाले लोग उसे समाप्त करने पर अड़े है |

हरियाणा जैसा राज्य जो अपनी लोकगीतों और सभ्यता के लिए जाना जाता था | वह आज ऑनर किल्लिंग के आकड़ों से राज्य की शोभा बढ़ा रहा है | हरियाणा का नाम तब सुर्ख़ियो में आया था जब करनाल की एक खाप पंचायत की तरफ़ से एक प्रेमी जोड़े ( मनोज़ और बबली ) को मार डालने का फ़रमान जारी किया गया था | इसी के बाद इन खाप पंचायतों पर सवाल खड़े हो गए थे | हरियाणा के ही ग्राम ईस्माईल ( जिला रोहतक ) के ग्रामीणो ने अक्टूबर 1999 के तृतीय सप्ताह में एक नव दंपति की हत्या इसलिए कर दी की उन्होने जातिवाद को चुनौती दी थी | ( स्रोत – तूफान , के . एस , नारी : तन मन गिरवी कब तक , पृ 182 ) रोहतक में ही एक प्रेमी जोड़े 20 वर्षीय धर्मेन्द्र और 20 वर्षीय लड़की निधि की हत्या कर दी गयी ( स्रोत – zee news india.com/india/news ) हरियाणा के ग्राम में नवदंपति निर्मला और देशराज की हत्या ग्रामवासियो ने दिन दहाड़े कर दी | ( स्रोत तूफान , के . एस , नारी : तन मन गिरवी कब तक , पृ. 182 )

इसके अलावा कुछ ऑनर किल्लिंग निम्नलिखित है –

गाँव/मोहल्ला

ख़दरावली


थाना

काधाला


नाम/युवक

सतीश


नाम/युवती

सरिता


दिनांक

06/08/1993


विवरण

पंचायत के आदेश पर दोनों का सिर कलम

खालापर


मुज्जफ़र


कासिम


डॉ.नाज़


30/03/2001


सरे बाज़ार गोली मार करके हत्या और टुकड़े करके हत्या

अलीनगर


झिझाना


विशाल


सोनू


07/08/2001


दोनों की फासी लगा करके हत्या

जसाला


काधाला


संजय


पूनम


27/09/२००१


धारधार हथियार से हत्या

कूड़ाना


शामली


अनिल


गीता


१३/०५/2002


पंचायत ने अनिल को जूते मारे , दोनों ने जहर खा कर आत्महत्या कर ली

मुझेड़ा


मीरापुर


इरफ़ान


शबीना


07/02/2002


सगाई तय होने के बावजूद , शबीना को नंगा घुमाया

ढ़राण हत्या प्रकरण


वेदपाल हत्या कांड


बलहमबा हत्या कांड


सिवाना हत्या कांड


स्रोत–www.khap panchayat.com/hindi


अन्य स्रोत- तूफान , के . एस , नारी : तन मन गिरवी कब तक , पृ 182

अन्य स्रोत- तूफान , के . एस , नारी : तन मन गिरवी कब तक , पृ 182 स्रोत–

www.khaappanchyat.com

यदि हम इन आकड़ों पर नज़र ड़ाले तो पता चलता है की यह आकड़े सिर्फ सम्मान के लिए की गई हत्या को ही दर्शाते है | यदि उपर के दो आकड़ों पर ध्यान दे तो सिर्फ पंचायत का नाम दिया गया है | क्योकि खाप का जो भी कार्य होता है वह सुनियोजित होता है | इसमे शामिल सभी लोगो की मानसिकता एक सी ही होती है | यानि सभी के सभी एक ही मनोवैज्ञानिक नजरिये से कार्य करते है | उनका मूल उद्देश्य सिर्फ हत्या ही करना नहीं होता है बल्कि उनका संदेश भी होता है की यदि कोई हमारे खिलाफ कार्य करेगा तो उसका भी यही हाल होगा |

TABLE -1

CAST-VISE ANALYSIS OF THE ACCUSED

CAST OF THE ACCUSED


PERCENTAGE

Jats


91.95

khatris


6.89

dalits


1.14

TABLE – 1 में जो आकड़े प्रस्तुत किए गए है | उसके अनुसार जाट सम्मान के लिए की गई हत्या में 91.95 % शामिल है जबकि खत्री और दलित क्रमश 6.89 % और 1.14 | जाटों का इसमे शामिल होने का सबसे बड़ा कारण जो है उनकी संस्कृति | जाटों का जो भी इतिहास रहा है वह चरवाहों का रहा है | डॉ.दामोदर लाल गर्ग[1] लिखते है की “ जाटों का अधिकाश जीवन यायावर रहा है | जिसके कारण उनकी संस्कृति का लोप हो गया |” “इतना ही नहीं महाभारत[2] के अनुसार भी जाटों का रिश्ता श्री कृष्ण से भी माना जाता है |” जिसका परिणाम यह हुआ की शिक्षा का जितना विकास अन्य जगहों पर हुआ वह हरियाणा में नहीं हो सका अर्थात यू कहे की जाटों के बीच शिक्षा हमेशा ही गौण रही है | दलितों में यह संख्या इसलिए कम है क्यूकि जितना सुधार आंदोलन महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में हुआ उतना उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यो में नहीं हुआ | यदि हुआ भी तों उसका जबरदस्त विरोध हुआ | इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की जब एक समय सती प्रथा का विरोध राजा राम मोहन राय कर रहे थे | तों दूसरी तरफ राधाकान्त देव इसके महत्व का प्रचार कर रहे थे | यानि सुधार आंदोलन एक ही समय सभी जगह नहीं चल रहा था | जब दक्षिण जैसे राज्यो में रुढियो को तोड़ने के लिए आंदोलन चल रहा था | तों उसी समय उत्तर भारत के राज्यो 1857 की क्रांति हों रही थी | 19 सदी में जब सुधार आंदोलन के कारण जब कुछ राज्य कुरीतियों और रुढियों को तोड़ कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे | तों वही कुछ राज्य अपनी जगीदारी औरसत्ता को ही बचाने में लगे थे | आज इसी का परिणाम है की जो चेतना की विकास और शिक्षा का विकास जाटों में होना चाहिए था वह नहीं हो सका | इसलिए इन आकड़ों में जाटों की संख्या कुछ ज्यादा ही है | जहा तक मेरा मानना है की इसमे जाटों का उतना दोष नहीं जितना की उस समय की परस्थितियों का है |

TABLE-2

PROPORTION OF THE KILLING OF GIRLS AND BOYS

GENDER


PERCENTAGE

Killingof girl only


41

Killing of boy only


12

Killing of girl and boy


47

TABLE-3

AGE OF GIRL KILLED FOR HONOUR

AGE GROUP ( in years )


PERCENTAGE

15-19


40

20-25


60

TABLE-4

AGE OF BOY KILLED FOR HONOUR

AGE GROUP (in years )


PERCENTAGE

20-25


79

26-30


14

31-35


7

स्रोत- International Research Journal Of Social Sciences,Vol.3(6) 7-16.june 2014.

TABLE-5

CAUSE OF HONOUR KILLING

ALLEGED


PERCENTAGE

Inter-cast relationship


44

Relationship within same village


28

Family intolerant relationship


28

TABLE-6

AFFILIATION OF THE KILLING

RELATIONSHIP ( with deceased girl )


Percentage

Involvement of father


64

Involvement of brother/s


36

Involvement of mother


12

Involvement of patrrnal/maternal uncle/s


28

Involvement of other Associates


08

Involvement of contract killers


16

TABLE-7

DIMENSIONS OF THE RELATIONSHIP

NATURE AND EXTENT


Percentage

In Relationship


36

Elopement


16

Secret marriage without consent of girl’s family


20

Caught in compromising condition


28

स्रोत- International Research Journal Of Social Sciences,Vol.3(6) 7-16.june 2014.

समाज में आनर किल्लिंग यानि इज्ज़त के नाम पर हत्या को लेकर दो परस्पर विरोधी मत निरंतर मौजूद रहे है | कुछ लोग कहते है की गोत्र ,समुदाय ,धर्म ,तथा सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाया जा सकता है तो वही दूसरी तरफ़ लोग इसकी निंदा करते है तथा मानते है की इंसानियत बड़ी है | झूठी शान प्राप्त करने के चक्कर में जो लोग हत्या कर रहे है | उससे उत्तपन हानि को नहीं देख पा रहे है | इस पृष्ठ भूमि में खाप पंचायत से यह सवाल करना चाहिए की क्या इज्ज़त के नाम पर हो रही हत्या को सही ठहराया जा सकता है ? क्या सम्मान की रक्षा व्यक्ति के जीवन से ज़्यादा जरूरी है ? यदि समाज में यौन विकृतिया फैल रही है और यदि इसे खाप पंचायत गलत मानती है तो हत्या करने के बजाय इस समस्या का हल ख़ोजे | हत्या करना एक जघन्य अपराध भी है और खाप पंचायतों का पाप भी | कुल मिलाकर के खाप पंचायतों को इस समय गहन आत्ममंथन करने व समय की माग को सहज़ स्वीकार करते हुए संवैधानिक ड़गर पर चलने की कड़ी जरूरत है | लोकतंत्र के महत्व को स्पष्ट करते हुये “फ्रांसिस फुकोयामा” ने अपनी पुस्तक “दि एंड ऑफ हिस्ट्री एंड दि लास्ट मैन” (1992) में लिखते हैं की इतिहास दो वर्गों के दबाव से बनता है | यह दबाब है मालिक और गुलाम | ये दोनों शांति के साथ सिर्फ जनतंत्र अर्थात लोकतंत्र में ही रह सकते है | दूसरी तरफ “जाँक देरिदा” लिखते है कि विकास जनतंत्र में ही संभव है | जनतंत्र में ही अन्य कि मुक्ति संभव है | जनतंत्र की धुरी है समानता और समानता पर आधारित न्याय का शासन न्यायपालिका और न्याय के बिना जनतंत्र का काम करना संभव नहीं हैं | आज इसी को चुँनौती खाप पंचायते अपनी अनुचित कार्य के द्वारा न्यायपालिका , लोकतंत्र और संविंधान को दे रही है | पंडित जवाहर लाल नेहरु ने भी कहा था कि ....

अब देश को विखंडित करने वाली प्रवृतियां सामने आ गई है और देश की सुरक्षा सबसे जरुरी काम है | इसलिए पूरे देश के लिए जरुरी बात ये है कि पहले वह मजबूती से परिपूर्ण और सभी तरह के खतरों और समस्यायों का सामना करने के लिए तैयार हो जाए | अगर हिन्दुस्तान का वजूद कायम रहता है तो देश के सभी हिस्से कायम रहेगें तथा विकास करेगें | अगर हिन्दुस्तान कमजोर होता है तो उसके सारे घटक कमजोर हो जायेगें |

संदर्भ ग्रंथ सूची .

हिंदी में .

· बसु , दुर्गा दास : 2008 , भारत का संविधान , नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया , नई दिल्ली

· गांधी , महात्मा : 2010 , हिन्द स्वराज , प्रभात पेपर बैक्स , नई दिल्ली

· चंद्र , बिपन : 2011 , समकालीन भारत , अनामिका पब्लिशर , नई दिल्ली

· तूफ़ान , के . एस : 2008 , नारी : तन मन गिरवी कब तक , साहित्य संथान , गाज़ियाबाद

· तिवारी , इति : 2008 , नारी और समाज , विश्वविद्यालय प्रकाशन , नई दिल्ली

· वहोरा , आशा. रानी : 2005 , आधुनिक समाज़ में स्त्री , नटराज प्रकाशन , नई दिल्ली

· वोल्सटन क्राफ़्ट , मेरी : 2003 , स्त्री अधिकारों का औचित्य साधन , राजकमल प्रकाशन , नई दिल्ली

· वहोरा , आशा . रानी : 2006 , औरत कल आज और कल , कल्याणी शिक्षा परिषद , नई दिल्ली

· मेहता , चेतन : 2004 , महिला एवं क़ानून , शशि भूषण प्रकाशन , नई दिल्ली

· वर्मा , अर्चना : 2008 , अस्मिता – विमर्श का स्त्री स्वर , मेघा बुक्स , नई दिल्ली

· गांधी , महात्मा : 2010 , मेरे सपनों का भारत , डायमंड़स बुक्स , नई दिल्ली

· किश्ववर , मधु पुर्णिमा : 2005 , राष्ट्रवाद की चाकरी में धर्म , वाणी प्रकाशन , नई दिल्ली

English Book.

· Chandra , sudha dogra : April , 15 , 2013 , Manoj And Babli : A Hate Story , Pengwin India New Delhi.

· Myth And Reality Of The Khap Panchyats : A Historical Analysis Of The Khap Panchyat And Khap panchyat : Article By , Suraj Bhan Bharadwaj

( Moti Lal Nehru College , Delhi University, Delhi ).

News Paper ( English ).

· The Tims Of India.

समाचार पत्र ( हिन्दी में )

· हिंदुस्तान ( 13 जुलाई , 2012 , 6 नवंबर 2012 , 20 नवंबर 2012 , 9 दिसंबर 2012 , 13 दिसंबर 2012 )

Website.

· www.khappanchyat.com

· www.gandhiportal.com

· www.heritageportal.com

NEWS CHANNELS LINKS.

· http://forum.jagranjunction.com/2011/10/31/honour.killing_in_india_honour_or_crul_mentality/.

· http://khabar.ndtv.com/news/india/charge_with_murder_who-commit-female_focticide-.khap_panchayat.

· http://khabarndtv.com/news/india/wemust_learn from-history-get-girl-married at 15 says-omprakashchutala.

· http://khabarndtv.com/news/india/haryana-khap_panchayat-meet-to-push-for-early-.marriages-for-girls.

विवेक पाठक

पी-एच.डी अहिंसा और शांति अध्ययन

ईमेल –vivek.pathak371@gmail.com

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा (महा )

गांधी हिल्स -442001

[1]डॉ. लाल , दामोदर गर्ग : जाटो का इतिहास


[2]महाभारत के अनुसार जाट यदुवंश से भी संबन्धित माने जाते है

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