भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र

लेख

भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र और उसके अंतर्गत आने वाले आठ राज्य विविधताओं से भरे हैं। प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण होने के बावजूद यह हिस्सा भारत देश के बाकी हिस्से से कटा हुआ है। यह सुंदर क्षेत्र देश के आठ राज्यों अरुणाचल प्रदेश,असम, मणिपुर,मेघालय,त्रिपुरा,नागालैंड, सिक्किम और मिजोरम में फैला है। पूर्वोत्तर भारत के ये आठ राज्य नेपाल, म्यांमार,भूटान, चीन और बांग्लादेश से घिरे हैं। भारत के बाकी हिस्से से यह क्षेत्र भूमि की 21 -40 कि.मी. की एक छोटी पट्टी से जुड़ता है जो पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में स्थित है। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, घने जंगल, प्राकर्तिक गुफाएं,वन्य जीवन, खूबसूरत झीलें, वनस्पति व जीव तथा ब्रह्मपुत्र जैसी गहरी नदियाँ देश के इस हिस्से को वास्तविक स्वर्ग बनाते हैं। यह भारत का प्रमुख आदिवासी इलाका है जहां भाषा, भोजन, पोशाक व बोलियों की सौ से अधिक किस्म देखने को मिलती है। भौगोलिक परिस्थितियों व पर्यावर्णीय स्थिति में उत्तम पूर्वोत्तर भारत की विशेषता यहाँ के कीट खाने वाले पिचर पौधे व एक सींग वाले गैंडे भी हैं। तेल, कोयला युरेनियम आदि की खान माने जाने वाले इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी भी बहुत अलग है। असम में जहां खान-पान की ढेरो किस्म मौजूद हैं तो वहीँ सिक्किम में कंचनजंगा पर्वतीय छोटी (8586 मी.) विश्व की तीसरी सबसे बड़ी चोटी है। मेघालय में स्थित चेरापूंजी के नाम एक महीने में अधिकतम वर्षा (26461 मि.मी.) का रिकॉर्ड दर्ज है जबकि माउसिनराम में विश्व की सबसे अधिक औसत वर्षा (11873 मि.मी.) होती है। यहाँ के घने जंगल अपने अपनी संरचना के लिए विश्व विख्यात हैं। बम्बू व अगरबत्ती की खुशबू में प्रयोग आने वाला अगर इन्ही जंगलों में पाया जाता है। साथ ही मसाले व औषधियाँ भी यहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। हाल ही में भारत में हुए सुधारो ने कई राज्यों के सामाजिक- आर्थिक परिदृश्य को बदल दिया है लेकिन बहुत से राज्य विकास की दौड़ में पीछे छूट गए हैं। पूर्वोत्तर भारत के राज्य ऐसे ही राज्य हैं। देश के इस हिस्से की सामजिक-आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से भारत सरकार ने अलग विशेष मंत्रालय का गठन किया। यह मंत्रालय इन्ही आठ राज्यों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि मात्र विकास न होना ही यहाँ की समस्या नहीं है। पिछले 50 सालो से चीन अरुणाचल प्रदेश के एक बड़े हिस्से को दक्षिणी तिब्बत बताकर उस पर अपना अधिकार जता रहा है। इसके आलावा सामाजिक अव्यवस्थाएं, उपेक्षित व्यवहार और देश के बाकी हिस्से से कम जुड़ाव होना भी यहाँ की प्रमुख समस्या है। इसका परिणाम यह होता है कि यहाँ के निवासियों को अच्छी सुविधाए, बेहतर शिक्षा और अपने सपनों को पूरा करने के लिए देश के अन्य हिस्सों की तरफ रुख करना पड़ता है। दूसरी और हम ही अपने देशवासियों की समस्याओं और परेशानियों को जानने की कोशिश नहीं करते। इतना ही नहीं, उनके चेहरे की मंगोलोइड़ विषमता के कारण उनके साथ उपेक्षित व्यवहार करते हैं। उन्हें ‘चिंकी’ आदि नामो से पुकारने लगते है। अपने ही देश के होने के बावजूद ‘विदेशी’ समझने की गलती करते हैं। हमारा यह व्यवहार उन भाई-बहनों को उपेक्षित और अलग-थलग महसूस कराता है। हमारे देश की व्यवस्था विश्व में सबसे विशाल लोकतंत्र व्यवस्था है जहां धर्म, जात-पात और समुदाय की वजह से विकास में कोई बाधा नहीं आती है। ऐसे में पूर्वोत्तर भारत व बाकी हिस्से में सौहार्दता और बंधुत्व को बढ़ावा देना अति आवश्यक है।

-- तरूण वत्स उप संपादक यूनीवार्ता न्यूज एजेंसी , दिल्ली

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